विदाई समारोह पर निबंध | essay on farewell in hindi

vidai samaroh par nibandh

भूमिका

प्रायः प्रत्येक विद्यालय में यह परंपरा होती है कि बारहवीं कक्षा के विद्यार्थियों के लिए विदाई समारोह का आयोजन किया जाता है , जिसमें विद्यालय के शिक्षक व ग्यारहवीं कक्षा के विद्यार्थी भाग लेते हैं। जिस विद्यालय में दसवीं कक्षा तक पढ़ाई होती है, वहां दसवीं कक्षा के विद्यार्थियों को विदाई दी जाती हैं जिसमें नवीं कक्षा के विद्यार्थी और शिक्षक भाग लेते हैं।

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विदाई की तैयारी

मेरी बारहवीं कक्षा की परीक्षाएं करीब थीं। विद्यालय से परीक्षाओं की तैयारी के लिए अवकाश दिया जा चुका था , किंतु मुझे सदैव स्मरण रहेगा वह दिन जब हमारा विद्यालय में अंतिम दिन था। चूंकि यह हमारा विद्यालय में अंतिम वर्ष भी था। अतः हमें ग्यारहवीं कक्षा की ओर से विदाई दी जानी थी। प्राचार्य महोदय की देखरेख में सभी तैयारियां की गई व रविवार को विदाई समारोह का आयोजन रखा गया।

जब मैं दोपहर तीन बजे विद्यालय पहुंचा तो मैंने देखा कि ग्यारहवीं कक्षा के विद्यार्थियों द्वारा सभी तैयारियां पूर्ण की जा चुकी हैं। विद्यालय का मुख्य कक्ष पोस्टरों , खूबसूरत पुष्पों व चित्रों से सजा हुआ था एवं प्राचार्य महोदय तथा अन्य सम्मानित अतिथियों के बैठने का स्थान विशेष रूप से बनाया गया था। मध्य में मेज पर सुंदर गुलदस्ता रखा था। दोनों कक्षाओं के छात्रों व स्टाफ के लिए भी बैठने की उचित व्यवस्था थी।

छात्र का भावपूर्ण भाषण

समारोह चार बजे शुरू हुआ। अल्पाहार के लिए अनेक स्वादिष्ट चीजें थीं। हमने खूब बातें को , हंसी – मजाक किया और शिक्षकों के साथ बिना झिझक अपने हृदय की बातें कीं। पार्टी 5 बजे समाप्त हुई फिर विदाई समारोह प्रारंभ हुआ।

ग्यारहवीं कक्षा के छात्र प्रिंस ने एक भाव – पूर्ण विदाई भाषण पढ़ा , जिसमें उसने हमारी कक्षा के विद्यालय व छोटी कक्षाओं के साथ मधुर संबंधों के विषय में विस्तार से बताया। उसके वक्तव्य में हमारी कक्षा की संतुलित शब्दों में प्रशंसा की गई थी। उसके बाद एक अन्य विद्यार्थी ने भी एक कविता पढ़ी जो कि बहुत मनोरंजक व विनोद पूर्ण थी। जिससे वातावरण कुछ हल्का हो गया। उसके बाद पुन: प्रिंस ने हम सबके उज्ज्वल भविष्य की कामना की व ईश्वर से प्रार्थना की। उसका बोलने का अंदाज हृदय को छू लेने वाला था।

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शिक्षकों का आशीर्वाद

उसके बाद मैंने अपनी कक्षा की ओर से मेजबान कक्षा का धन्यवाद किया और अपने शिक्षकों व सम्मानीय प्राचार्य का आशीष प्राप्त किया। अपने धन्यवाद भाषण में मैंने मेजबान कक्षा द्वारा किए गए अच्छे प्रबंध के लिए उनको धन्यवाद दिया व उनके द्वारा दी गई शुभकामनाओं को हृदय से स्वीकार किया। व्याख्यान देते समय मेरे मन में मिश्रित भाव थे। मेरे मन में अपने विद्यालय , जिसके प्रांगण में शरारतें करके बड़े हुए थे , उससे बिछुड़ने की वेदना थी। इसी विद्यालय ने हमारी आत्मा व शरीर को सजाया संवारा है। हमें जीवन के थपेड़ों से लड़ने के लिए पतवार यहीं के शिक्षकों ने दी है। मेरे लिए यह विद्यालय ज्ञान व बुद्धि का साकार रूप है जिसका सात्विक वातावरण सदैव मेरी स्मृतियों में बना रहेगा।

प्रधानाचार्य के विचार

मेरे लिए मेरा विद्यालय केवल विद्या प्राप्ति का माध्यम नहीं अपितु संस्कृति एवं संस्कार देने का मंदिर है। अंत में हमारे विद्यालय के प्रिंसिपल , जो हमारे विद्यालय के साथ प्रारंभ से जुड़े हैं और एक – दूसरे का पर्याय माने जाते हैं , ने एक प्रभावशाली वक्तव्य दिया। अपने विदाई संदेश में उन्होंने हमें जीवन में काम आने वाली अनेक बातें बताईं , परामर्श एवं शुभकामनाएं दीं। उन्होंने हमसे हमारे स्वास्थ्य व चरित्र को दृढ़ रखने की बात की। सेवा तथा त्याग का आदर्श हमारे सम्मुख रखा तथा देशभक्ति और राष्ट्रवाद को सदैव हृदय में बसाने के लिए कहा।

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निष्कर्ष

हमने अपने शिक्षकों के आशीर्वाद के साथ विद्यालय से विदाई ली। अपने मित्रों के साथ शुभकामनाओं का आदान-प्रदान करके बिछड़ते हुए हृदय भारी हो गया। हमें अपने विद्यालय के प्रति सदैव कृतज्ञ होना चाहिए। जहां हमने अपने जीवन का सबसे रचनात्मक समय गुजारा है। वह विदाई समारोह मेरे स्मृति पटल पर अंकित है।

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